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अपनी ही भाषा 'हिंदी' को एक दिवस के रूप में क्यों मना रहे हैं?

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                                                                                  Picture Credit: Amar Ujala भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 में हिंदी को राजभाषा का दर्ज़ा दिया. लेकिन यह हिंदी के सम्मान से ज्यादा उस पर कुठाराघात अधिक प्रतीत होता है क्योंकि जिस हिंदी को पूरा भारत राष्ट्रभाषा का सम्मान देता रहा, उसे 1949 में उसेक पद से गिराकर एक गौण राजभाषा का दर्ज़ा प्रदान कर दिया गया. राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(5) में यह सर्वसम्मति से प्रावधान किया गया कि जब तक एक भी राज्य एसा रहता है जो अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को नहीं अपनाता, तब तक अंग्रेजी सह-राजभाषा के रूप में भारतवर्ष में प्रयोग में लायी जाती रहेगी. इसके बाद भी हिंदी भाषा को ऐसे कई आघात पहुंचाए गये जिससे उसे राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिला. स्पष्ट है कि सम्मानित राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रतिष्ठित होने के सभी रास्ते अवरुद...

मेरे सपनों का 'भारत'

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  (फोटो: गूगल) अपने देश को बड़ा और लोकतांत्रिक रूप से सफल बनाने का सपना हर किसी का होता है। एक ऐसा देश जहां सभी क्षेत्रों में समानता हो और सभी लिंगों के लिए प्रगति हो। औरों की तरह मेरा भी एक सपना है, एक सपना, मेरे भारत के लिए। मेरे सपनों का भारत शांति और सद्भाव से भरा स्थान होगा, एक ऐसा स्थान जहां लोग करुणा, खुशी और उत्साह से भरे होंगे। मैं एक ऐसा भारत देखती हूं जहां प्रत्येक व्यक्ति के पास एक मजबूत मूल्य प्रणाली होगी, जहां सभी मनुष्य समान होंगे। मैं भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखने का सपना देखती हूं जहां हर किसी की शिक्षा तक पहुंच हो। ऐसे बच्चे हैं जो गरीब पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं और वित्तीय अस्थिरता के कारण उचित/गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते हैं। ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जानी चाहिए। इसके अलावा, लिंग की परवाह किए बिना शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। मेरे सपनों के भारत में ऐसी महिलाएं शामिल हैं, जिनका हर जगह सम्मान हो। जिन महिलाओं के पास पुरुषों के बराबर शक्ति और अधिकार हो। मैं चाहती हूं कि भारत एक ऐसी जगह बने जहां महिलाएं खुद फैसले ले सकें और किस...

निबंध: महिला सशक्तिकरण

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  सिनेमाघरों से बाहर आने वाले लोग अक्सर फिल्म के अभिनय कौशल और अद्भुत कलाकारों की सराहना करते देखे जाते हैं। क्या आपने कभी किसी को कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर, संपादक, पटकथा लेखक, या कैमरे के पीछे कलाकारों से अधिक काम करने वाले किसी व्यक्ति की सराहना करते देखा है? ऐसा ही हर दिन महिलाएं महसूस करती हैं। घर और बच्चों की देखभाल करने के बाद और यहां तक कि दैनिक कामों को भी संभालने के बाद। हमारे समाज में उनकी पर्याप्त सराहना नहीं की जाती है। हम ऐसी दुनिया में विकास की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जहां महिलाओं को निर्णय लेने में शामिल नहीं किया जाता है या समानता नहीं दी जाती है?  हमारे समाज में पुरुषों और महिलाओं के लिए बोलने और विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता अलग-अलग है। एक पुरुष अपने मन की बात कह सकता है, और जीवन में अपने फैसले खुद कर सकता है जबकि एक महिला की अपनी कल्पना पर भी एक सीमा होती है। महिलाओं को जीवन में उच्च कल्पना या लक्ष्य रखने की भी अनुमति नहीं है क्योंकि उनकी भूमिका केवल खाना पकाने, साफ-सफाई और परिवार की देखभाल तक ही सीमित है। ऐसी दुनिया में जहां समाज में महिला का वर्चस्व है, महिलाओ...

इलेक्ट्रोनिक मीडिया

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आज के युग में विज्ञान का प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई पड़ता है । सभी ओर वैज्ञानिक साधनों का बोलबाला है । यही तो है वैज्ञानिक चमत्कार कि मनुष्य का मन, आत्मा और शरीर वैज्ञानिक साधनों के बल पर अपना कार्य करने लगा है । विज्ञान में मानव जीवन को सुखी बनाने के असीम शक्ति विद्यमान है । वर्तमान जीवन में 'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया' ने लोगों के जीवन में एक नयी क्रांति ला दी है । टेलिविज़न, रेडियो, इंटरनेट व मीडिया भी जनता की एक समग्र जागरूकता बढ़ाने के लिए उचित है । रोज़मर्रा की जिंदगी के अधिक से अधिक जानकारी आज मीडिया द्वारा संभव है । मीडिया दुनिया भर की जानकारी इकठ्ठा करके हमारे सामान्य ज्ञान को बढ़ाने में हमारी मदद करता है । विभिन्न मीडिया के माध्यम से समाचार प्रसारण हमे दुनिया में दिन - प्रतिदिन की घटनाओं के बारे में बताते हैं । विश्व अंतरजाल पर घटित होने वाली गतिविधियों ने आधुनिक विश्व समुदाय में एक नवीन सांस्कृतिक चेतना का संचार किया है । जिस प्रकार किसी भी विचारधारा या उपलब्धि के अनेक आयाम होते हैं, उसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के भी अनेक घनात्मक और ऋणात्मक आयाम होते हैं । इलेक्ट्रॉ...