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दोस्त की शादी और बैजरो

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उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित एक अद्भुत राज्य है, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यह राज्य प्रकृति की अनमोल संपदा और पवित्र नदियों के लिए प्रसिद्ध है। इस राज्य में घने जंगल, राजसी पहाड़ और शांत सुंदरता आपको खुद में खोने के लिए मजबूर कर देती है। ऐसे ही एक छोटे से गाँव का चित्रण है, जो  "बैजरो" के नाम से प्रसिद्द है। बैजरो उत्तराखंड के एक खूबसूरत गांव का नाम है, जहाँ  के लोग एक सांझ के ढलक में खो जाते हैं। मैंने और मेरे दोस्तों ने अपने खास दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए एक अनोखी यात्रा की योजना बनाने का फैसला किया और पहुँच गये आनंद विहार बस अड्डे अपना सामन बाँध कर। यात्रा की शुरुआत: हमारी यात्रा प्रकृति और सौंदर्य से भरपूर आनंद विहार बस अड्डे से शुरू हुई। ISBT से बैजरो तक का सफर लगभग 380 किलोमीटर का था और हमने अपने दोस्त के साथ बस  में सफर किया। रास्ते में हमें कुछ दिलचस्प गांव भी दिखे, जिनका इतिहास हमें अपनी कहानी बताने पर मजबूर कर गया। विकास से दूर, इन गावों की सांझें अपने एक अलग दुनिया में बसी हुई थी।   और इस सफ़र में अगर मैं हमारे बस ड्राईवर भई...

उड़ीसा: अकेले की गयी पहली यात्रा

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  मेरी पहली अकेले की गयी यात्रा दिल्ली से ओडिशा तक की थी। ओडिशा इसीलिए क्योंकि वहाँ कोई अपना रहता है, वरना हमारे समाज में अक्सर अकेली बेटी को पहली बार कहाँ ही अकेले जाने की इज़ाज़त दी जाती है!  अब, जाने का तय हो चुका था, सामान भी समेट लिया था और जाने की इतनी ख़ुशी थी कि पता नहीं क्या-क्या रख लिया था। ओडिशा, मैं उस व्यक्ति से मिलने गयी थी जो मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं । बचपन से लेकर अभी तक उनके लाड़-प्यार ने हमेशा सराहा है । उनसे मिलने की उत्सुकता में मानो ट्रेन का सफ़र सामान्य से अधिक प्रतीत हो रहा था। और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि वहाँ किसी को भी मेरे आने की खबर नहीं थी। वहाँ पहुँचकर सबके चेहरों की ख़ुशी देखने के बाद मुझे मेरा वहाँ जाना सार्थक मालूम पड़ा। खैर, आगे बढ़ते हैं…मेरे लिए जगन्नाथ जी की नगरी ओडिशा एकदम असाधारण शहरों में से एक है। वहाँ बिताया गया 10 दिन मेरे जीवन के सबसे ख़ूबसूरत पलों में से एक है।  ओडिशा उत्कृष्ट मंदिरों, विस्मयकारी स्मारकों, मनमोहक समुद्र तटों, आश्चर्यजनक रूप से सुंदर परिदृश्यों, वन्यजीव अभयारण्यों और बहुत कुछ का स्थान है जहाँ कलाकार और शिल्पकार को ...

सुकून और भाव का मिश्रण: मनाली

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  "सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ" - ख़्वाजा मीर दर्द मनाली, पहाड़ी ढलानों के बीच, मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्यों, आकर्षक जलधाराओं, छोटे छिपे हुए कॉटेज के आसपास परियों की कहानी जैसा कोहरा, और चीड़ और ताजगी की एक लंबी सुगंध के साथ पहाड़ प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। कुछ समय की तलाश में एक परिवार, कुछ शांति के लिए जोड़े, कुछ एकांत के लिए अकेले यात्री या रोमांच की तलाश में दोस्तों का समूह। मनाली हर तरह की यात्रा मानसिकता की जरूरतों को पूरा करता है। मेरी यात्रा दिल्ली के कश्मीरी गेट से वॉल्वो एसी स्लीपर से शुरू हुई। और मैं कुल्लू की लंबी यात्रा और संकरी सड़कों को तय करके सुबह 6 बजे मनाली पहुंच गयी लेकिन साथ ही हरे-भरे पहाड़ों और झरनों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी लिया। मेरा होटल वोल्वो बस स्टैंड के बहुत करीब था और चेक इन करने के बाद मैंने कुछ देर के लिए तरोताजा होकर आराम किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सुबह, मैंने सोलंग घाटी का दौरा किया, जो हरे-भरे पहाड़ों के अच्छे दृश्य प्रस्तुत करता है, और आप यहाँ सर्दियों में ग्लेशियर और ब...

श्री कृष्ण भूमि - मथुरा/वृन्दावन

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परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌।  धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ भावार्थ : साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ. मेरे अनुसार कृष्ण या कृष्णत्व का अर्थ है - असीम शांति और प्रेम. वैसे तो कृष्ण कण-कण में निवास करते हैं लेकिन मथुरा व वृन्दावन को कन्हैया की नगरी के नाम से जाना जाता है. मेरे इस ब्लॉग में आप मथुरा व यहाँ जन्मे श्री बांके-बिहारी जी के बारे में और करीब से जानेंगे.  कन्हैया,श्याम,गोपाल,केशव,द्वारकाधीश, वासुदेव, गोविन्द, माधव व कान्हा जैसी नामों से प्रख्यात 'कृष्ण' एक निष्काम कर्मयोगी, आदर्श दार्शनिक, स्थितिप्रग्य एवं दैवी संपदाओं से सुसज्जित महान पुरुष थे. श्री कृष्ण, हिन्दू धर्म के मान्यताओं के अनुसार विष्णु के ८वें अवतार माने गये हैं. कृष्ण का जन्म मथुरा नगरी में हुआ था, यह बात विश्व प्रख्यात है परन्तु मथुरा-वृन्दावन के कण-कण में कृष्ण निवास करते हैं यह केवल उन्हीं लोगों को महसूस हो सकता है, जिन्होंने वहाँ रहकर उस पल को महसूस किया हो...

उदय से अस्त तक का सफ़र: बनारस

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आर्ट गैलरी    अस्सी से मणिकर्णिका तक मानो जीवन का सफ़र देखा है  चहल-पहल सी जिन्दगी को श्मशान में ढलते देखा है  बेशक दरभंगा घाट की सुबह सुकून देती हो, पर  सम्पूर्ण बनारस को अपने जीवन में ढलते देखा है ! “ वाराणसी कहो , बनारस कहो या काशी…यह भूमि लोगों के जीवन में स्थिरता लाती है।” बनारस वह स्थान है, जहाँ जाकर मनुष्य अपने आत्मा को आध्यात्म से जोड़कर, परमात्मा की प्राप्ति तक का द्वार खोल सकता है । माँ गंगा के उस  निश्चल, निरंतर बहते हुए  जल को देखकर ऐसी असीम शांति की प्राप्ति होती है जैसी शांति मनुष्य परमात्मा की प्राप्ति पर या मरणोपरांत पाता है । यही असल मायने में ‘आध्यात्म’ है । गंगा की बहती कल-कल धारा में जब  लहरों द्वारा अपना रौद्र रूप दिखाया जाता है, तब मानो वह जीवन की उन सभी परेशानियों को एक साथ दर्शा रही होती है, जिससे  मनुष्य कदम-कदम पर अपने जीवन में जूझता है । इस शहर को किसी भी नाम से जानो या पुकारो, यह स्थान आपके जीवन में एक ऐसी छाप छोड़ता है, जो आपके मन और मस्तिष्क को जीवन के नए आयामों से अवगत करवाती है।  वो दिन मुझे अब भी याद है जब ब...