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फ़िल्म समीक्षा: 'The Kerala Story' (हिंदी में)

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निर्देशक: सुदीप्तो सेन कलाकार: अदा शर्मा, योगिता बिहानी, सोनिया बलानी, सिद्धि इदनानी, प्रणव मिश्रा रनटाइम: 138 मिनट IMDb रेटिंग: 7.5 कहानी: 'द केरला स्टोरी' केरल के विभिन्न क्षेत्रों की तीन युवा लड़कियों की कहानी सुनाती है, जिसमें शालिनी की कहानी पर प्राथमिक रूप से ध्यान दिया गया है, जिसका अपहरण कर बाद में उसे इस्लाम में परिवर्तित कर दिया जाता है। और उसे एक आतंकवादी के रूप में आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। समीक्षा: 'द केरला स्टोरी' केरल में युवा हिंदू महिलाओं के इस्लाम में कथित कट्टरता और धर्मांतरण के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसके बाद उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। फिल्म में कहा गया है कि यह केरल के विभिन्न हिस्सों की तीन युवा लड़कियों की सच्ची कहानी है। द कश्मीर फाइल्स के एक साथी अंश की तरह, फिल्म एक विभाजनकारी स्वर बनाए रखती है। 'द केरला स्टोरी' पूछताछ कक्ष में शुरू होती है जहां शालिनी (अदाह शर्मा) अपने भयानक और दुखद अतीत के बारे में विस्तार से बता रही है और बताती है कि वह संकट की स्थिति में क्यों है! उनकी बैकस्...

उड़ीसा: अकेले की गयी पहली यात्रा

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  मेरी पहली अकेले की गयी यात्रा दिल्ली से ओडिशा तक की थी। ओडिशा इसीलिए क्योंकि वहाँ कोई अपना रहता है, वरना हमारे समाज में अक्सर अकेली बेटी को पहली बार कहाँ ही अकेले जाने की इज़ाज़त दी जाती है!  अब, जाने का तय हो चुका था, सामान भी समेट लिया था और जाने की इतनी ख़ुशी थी कि पता नहीं क्या-क्या रख लिया था। ओडिशा, मैं उस व्यक्ति से मिलने गयी थी जो मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं । बचपन से लेकर अभी तक उनके लाड़-प्यार ने हमेशा सराहा है । उनसे मिलने की उत्सुकता में मानो ट्रेन का सफ़र सामान्य से अधिक प्रतीत हो रहा था। और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि वहाँ किसी को भी मेरे आने की खबर नहीं थी। वहाँ पहुँचकर सबके चेहरों की ख़ुशी देखने के बाद मुझे मेरा वहाँ जाना सार्थक मालूम पड़ा। खैर, आगे बढ़ते हैं…मेरे लिए जगन्नाथ जी की नगरी ओडिशा एकदम असाधारण शहरों में से एक है। वहाँ बिताया गया 10 दिन मेरे जीवन के सबसे ख़ूबसूरत पलों में से एक है।  ओडिशा उत्कृष्ट मंदिरों, विस्मयकारी स्मारकों, मनमोहक समुद्र तटों, आश्चर्यजनक रूप से सुंदर परिदृश्यों, वन्यजीव अभयारण्यों और बहुत कुछ का स्थान है जहाँ कलाकार और शिल्पकार को ...

पुस्तक समीक्षा : बनारस टॉकीज़

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  फ़ोटो: गूगल  "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं  सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं  सुना है रब्त है उसको खराब हालों से  सो अपने आप को बर्बाद करके देखते हैं  सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं  यह बात है तो चलो बात करके देखते हैं सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं  सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं  सुना है रात से बढ़कर है काकुलें उसकी  सुना है शाम को साये गुज़र के देखते हैं  सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं  सो हम बहार पर इलज़ाम धर के देखते हैं  सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है  कि फूल अअपनी कबाएँ क़तर के देखते हैं ।" ~ सूरज उर्फ़ 'बाबा' (बनारस टॉकीज़) लेखक - सत्य व्यास मूल्य - रु. 152 (पेपरबैक) प्रकाशन - हिंद युग्म जिन्हे बनारस से प्रेम है उनके लिए तो कोहिनूर है 'बनारस टॉकीज़' और जिन्हे बनारस से प्रेम नहीं है, तो उन्हें पढ़कर अवश्य हो जाएगा। क्या ही कहना इस उपन्यास के बारे में…ये कहानी है बी• एच• यू• से एल• एल• बी• कर रहे है कुछ युवाओं की है। इसका मुख्य किरदार है ‘विशाल’ जो इस कहानी का वक्ता है और इस ...

सुकून और भाव का मिश्रण: मनाली

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  "सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ" - ख़्वाजा मीर दर्द मनाली, पहाड़ी ढलानों के बीच, मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्यों, आकर्षक जलधाराओं, छोटे छिपे हुए कॉटेज के आसपास परियों की कहानी जैसा कोहरा, और चीड़ और ताजगी की एक लंबी सुगंध के साथ पहाड़ प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। कुछ समय की तलाश में एक परिवार, कुछ शांति के लिए जोड़े, कुछ एकांत के लिए अकेले यात्री या रोमांच की तलाश में दोस्तों का समूह। मनाली हर तरह की यात्रा मानसिकता की जरूरतों को पूरा करता है। मेरी यात्रा दिल्ली के कश्मीरी गेट से वॉल्वो एसी स्लीपर से शुरू हुई। और मैं कुल्लू की लंबी यात्रा और संकरी सड़कों को तय करके सुबह 6 बजे मनाली पहुंच गयी लेकिन साथ ही हरे-भरे पहाड़ों और झरनों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी लिया। मेरा होटल वोल्वो बस स्टैंड के बहुत करीब था और चेक इन करने के बाद मैंने कुछ देर के लिए तरोताजा होकर आराम किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सुबह, मैंने सोलंग घाटी का दौरा किया, जो हरे-भरे पहाड़ों के अच्छे दृश्य प्रस्तुत करता है, और आप यहाँ सर्दियों में ग्लेशियर और ब...

कविता : इश्क़ है!

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 फोटो : मेरे द्वारा बनाई गयी है  भरी महफ़िल में एकाएक यह सवाल उठा  कि ज़रा कोई बताएगा, इश्क़ क्या है ?  मैंने भी हामी भरी और शुरू किया कि जनाब ज़रा गौर से सुनियेगा  जब आपकी झुकी नज़रें लाज़ से उठी ना हो और मेरी पूरी उमर थम सी गई हो, हाँ, मेरी पूरी उम्र थम सी गई हो। ये इश्क़ है। वो कहना भी ना चाहे  और मेरा दिल समझ जाए  दूरियाँ जब तरपायें  और मिलने की तारीख नज़र ना आए  हां, ये भी एक इश्क़ है। बातें ना हो पर आंखे सारा हाल बताएं  जिसका अंजाम न मैं जानूं  न वो वाकिफ़ हो  और जताने का हक सिर्फ मुझे हो  जी हां...यही इश्क़ है । जब घंटों की मुलाक़ात पल भर की लगे और पल भर में मानो पूरी उम्र निकल जाए, यही इश्क़ है। उसके जाने बिना उसे चाहना , इश्क़ है  उसकी बातों में  अपना ज़िक्र ढूंढना , इश्क़ है  उसकी उलझनों को   खुद से सुलझाना , इश्क़ है। जब बिन मांगे हमें खुदाई मिल जाए ऐसा हमारा इश्क़ है। तुम्हारी एक झलक से हम अपने आप में पूर्ण हो जाएँ, पास ना हो तुम फिर भी हम इतरायें, ये भी एक इश्क़ है। गगन के आज़ाद पंछी को सागर की गहराई ब...

मेरे सपनों का 'भारत'

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  (फोटो: गूगल) अपने देश को बड़ा और लोकतांत्रिक रूप से सफल बनाने का सपना हर किसी का होता है। एक ऐसा देश जहां सभी क्षेत्रों में समानता हो और सभी लिंगों के लिए प्रगति हो। औरों की तरह मेरा भी एक सपना है, एक सपना, मेरे भारत के लिए। मेरे सपनों का भारत शांति और सद्भाव से भरा स्थान होगा, एक ऐसा स्थान जहां लोग करुणा, खुशी और उत्साह से भरे होंगे। मैं एक ऐसा भारत देखती हूं जहां प्रत्येक व्यक्ति के पास एक मजबूत मूल्य प्रणाली होगी, जहां सभी मनुष्य समान होंगे। मैं भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखने का सपना देखती हूं जहां हर किसी की शिक्षा तक पहुंच हो। ऐसे बच्चे हैं जो गरीब पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं और वित्तीय अस्थिरता के कारण उचित/गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते हैं। ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जानी चाहिए। इसके अलावा, लिंग की परवाह किए बिना शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। मेरे सपनों के भारत में ऐसी महिलाएं शामिल हैं, जिनका हर जगह सम्मान हो। जिन महिलाओं के पास पुरुषों के बराबर शक्ति और अधिकार हो। मैं चाहती हूं कि भारत एक ऐसी जगह बने जहां महिलाएं खुद फैसले ले सकें और किस...

निबंध: महिला सशक्तिकरण

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  सिनेमाघरों से बाहर आने वाले लोग अक्सर फिल्म के अभिनय कौशल और अद्भुत कलाकारों की सराहना करते देखे जाते हैं। क्या आपने कभी किसी को कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर, संपादक, पटकथा लेखक, या कैमरे के पीछे कलाकारों से अधिक काम करने वाले किसी व्यक्ति की सराहना करते देखा है? ऐसा ही हर दिन महिलाएं महसूस करती हैं। घर और बच्चों की देखभाल करने के बाद और यहां तक कि दैनिक कामों को भी संभालने के बाद। हमारे समाज में उनकी पर्याप्त सराहना नहीं की जाती है। हम ऐसी दुनिया में विकास की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जहां महिलाओं को निर्णय लेने में शामिल नहीं किया जाता है या समानता नहीं दी जाती है?  हमारे समाज में पुरुषों और महिलाओं के लिए बोलने और विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता अलग-अलग है। एक पुरुष अपने मन की बात कह सकता है, और जीवन में अपने फैसले खुद कर सकता है जबकि एक महिला की अपनी कल्पना पर भी एक सीमा होती है। महिलाओं को जीवन में उच्च कल्पना या लक्ष्य रखने की भी अनुमति नहीं है क्योंकि उनकी भूमिका केवल खाना पकाने, साफ-सफाई और परिवार की देखभाल तक ही सीमित है। ऐसी दुनिया में जहां समाज में महिला का वर्चस्व है, महिलाओ...