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स्व-प्रेरणा

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मेरा मानना है कि दुःख/निराशा एक व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि हर सिक्के के दो पहलु होते हैं उसी प्रकार दुःख/पीड़ा/दर्द के भी हैं…यह केवल नकारात्मकता लेकर हमारे जीवन में प्रवेश नहीं करती है अपितु अगर हम इसके दुसरे पहलू पर गौर करें तो इससे हमारे जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। दर्द और संघर्ष के बिना आपके पास ताकत और अपना व्यक्तित्व कभी नहीं हो सकता है। नकारात्मक लोगों के बिना आप अपने जीवन में सकारात्मक लोगों की सराहना कभी नहीं कर सकते हैं। जीवन के उस एक अस्वीकृति के बिना आपको कुछ बेहतर करने के लिए निर्देशित नहीं किया जा सकता था। किसी एक व्यक्ति के यह कहे बिना कि आप यह नहीं कर सकते, आपको किसी कार्य को करने की प्रेरणा नहीं मिल पाती।  दुःख और अवसाद को महसूस किये बिना आज आपके पास करुणा की कमी हो सकती है और शायद कई लोगों में होगी भी। किसी भी दर्दनाक अंत के बिना आपको उस महान नई शुरुआत की ओर नहीं ले जाया जा सकता है।   हर वस्तु/क्षण में एक कारण और एक उद्देश्य अवश्य होता है, और हर यही नही उसमें एक सच्चा आशीर्वाद होता है यदि आप ...

अनुभूति

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जब जीवन आप पर बुरे वक़्त के रूप में आप पर कठिन प्रहार करता है, तो वह आपको पूर्णतः बदल देता है। उस एक घटना मात्र से ही आपमें अनेक बदलाव आने लगते हैं। उसके बाद आप एक अलग व्यक्ति बन जाते हैं। और मैं एक उदास, नकारात्मक आत्मा बन गई। मैंने खुद को आश्वस्त किया कि मैं फिर से कभी खुश नहीं रह सकती। ऐसा भी नहीं है कि मैंने इससे लड़ने की कोशिश नहीं की। मैंने वह सब कुछ आजमाया जो लोग आपको सुझाते हैं।  मैंने अनेक प्रेरणादायक फिल्में देखीं। मैंने खूब खुशनुमा गाने सुने। मैंने कई सेल्फ हेल्प बुक को पढ़ना शुरू कर दिया। मैंने प्रेरक वीडियो देखने शुरू किये। मैंने नए दोस्त बनाये। मैं अपने आप को व्यस्त रखने लगी। इन सभी के अलावा मैंने एक यात्रा भी की। लेकिन मुझेमें कुछ भी ठीक नहीं हुआ। और इस कारण मेरा दिल और बुरी तरह टूट गया। मैं इतना असहाय, इतना हताश और इतना प्रयासरत महसूस कर रही थी कि मैंने फिर से खुश रहने के इस मिशन को छोड़ने का फैसला कर लिया। तब, मैंने अपने दुख को अपनी नियति मान लिया। मैंने इसे अपने ऊपर किसी का श्राप समझकर अपना लिया। हालांकि मैं कभी यह नहीं जान पायी कि मैंने इसके लायक होने के लिए क्...

प्रतीक्षा

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  वैसे मैं बहुत सोचती हूँ और सोचते-सोचते इतना अधिक सोच लेती हूँ कि अंततः नुक्सान मेरा ही होता है। बीते दिनों में सबकुछ ठीक नहीं रहा है और रहता भी नहीं है वैसे तो! और ये मेरी नहीं शायद सबकी ही कहानी है। अकसर लोग कई चीज़ों से परेशान रहते हैं परन्तु कौनसी चीज़ सबसे अधिक परेशान कर रही है ये कह पाना मुश्किल हो जाता है। अधिकांश लोगों के लिए , जीवन परिस्थितियों के बारे में है।   "मैं अकेली थी।"   "मुझसे किसी ने कहा कि मुझे एक बार जरुर   कोशिश करनी चाहिए।"   "मैं हमेशा इतनी ‘चूजी’ नहीं हो सकती हूँ।"   "इस तरह तो   मैं अकेली ही मर जाऊंगी।"   "मेरे माता-पिता से कई लोगों ने कहा कि यह मेरे विवाह योग्य उम्र है या मेरे विवाह करवाने का समय नजदीक है।"   ये सारी वो चीजें हैं जो अक्सर हमें रिश्ते या शादी में धकेल देती हैं।   हम प्यार में इसलिए नहीं पड़ते क्योंकि हम प्यार में हैं। बल्कि हम प्यार में पड़ जाते हैं क्योंकि दूसरों के मुताबिक हमें प्यार होना चाहिए था। और कितना दुखद है यह ?   आप कितने विवाहित लोगों को जानते हैं जिन्हें वास्तव में एक-दूस...

फ़िल्म समीक्षा: 'The Kerala Story' (हिंदी में)

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निर्देशक: सुदीप्तो सेन कलाकार: अदा शर्मा, योगिता बिहानी, सोनिया बलानी, सिद्धि इदनानी, प्रणव मिश्रा रनटाइम: 138 मिनट IMDb रेटिंग: 7.5 कहानी: 'द केरला स्टोरी' केरल के विभिन्न क्षेत्रों की तीन युवा लड़कियों की कहानी सुनाती है, जिसमें शालिनी की कहानी पर प्राथमिक रूप से ध्यान दिया गया है, जिसका अपहरण कर बाद में उसे इस्लाम में परिवर्तित कर दिया जाता है। और उसे एक आतंकवादी के रूप में आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। समीक्षा: 'द केरला स्टोरी' केरल में युवा हिंदू महिलाओं के इस्लाम में कथित कट्टरता और धर्मांतरण के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसके बाद उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। फिल्म में कहा गया है कि यह केरल के विभिन्न हिस्सों की तीन युवा लड़कियों की सच्ची कहानी है। द कश्मीर फाइल्स के एक साथी अंश की तरह, फिल्म एक विभाजनकारी स्वर बनाए रखती है। 'द केरला स्टोरी' पूछताछ कक्ष में शुरू होती है जहां शालिनी (अदाह शर्मा) अपने भयानक और दुखद अतीत के बारे में विस्तार से बता रही है और बताती है कि वह संकट की स्थिति में क्यों है! उनकी बैकस्...

उड़ीसा: अकेले की गयी पहली यात्रा

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  मेरी पहली अकेले की गयी यात्रा दिल्ली से ओडिशा तक की थी। ओडिशा इसीलिए क्योंकि वहाँ कोई अपना रहता है, वरना हमारे समाज में अक्सर अकेली बेटी को पहली बार कहाँ ही अकेले जाने की इज़ाज़त दी जाती है!  अब, जाने का तय हो चुका था, सामान भी समेट लिया था और जाने की इतनी ख़ुशी थी कि पता नहीं क्या-क्या रख लिया था। ओडिशा, मैं उस व्यक्ति से मिलने गयी थी जो मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं । बचपन से लेकर अभी तक उनके लाड़-प्यार ने हमेशा सराहा है । उनसे मिलने की उत्सुकता में मानो ट्रेन का सफ़र सामान्य से अधिक प्रतीत हो रहा था। और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि वहाँ किसी को भी मेरे आने की खबर नहीं थी। वहाँ पहुँचकर सबके चेहरों की ख़ुशी देखने के बाद मुझे मेरा वहाँ जाना सार्थक मालूम पड़ा। खैर, आगे बढ़ते हैं…मेरे लिए जगन्नाथ जी की नगरी ओडिशा एकदम असाधारण शहरों में से एक है। वहाँ बिताया गया 10 दिन मेरे जीवन के सबसे ख़ूबसूरत पलों में से एक है।  ओडिशा उत्कृष्ट मंदिरों, विस्मयकारी स्मारकों, मनमोहक समुद्र तटों, आश्चर्यजनक रूप से सुंदर परिदृश्यों, वन्यजीव अभयारण्यों और बहुत कुछ का स्थान है जहाँ कलाकार और शिल्पकार को ...

पुस्तक समीक्षा : बनारस टॉकीज़

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  फ़ोटो: गूगल  "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं  सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं  सुना है रब्त है उसको खराब हालों से  सो अपने आप को बर्बाद करके देखते हैं  सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं  यह बात है तो चलो बात करके देखते हैं सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं  सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं  सुना है रात से बढ़कर है काकुलें उसकी  सुना है शाम को साये गुज़र के देखते हैं  सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं  सो हम बहार पर इलज़ाम धर के देखते हैं  सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है  कि फूल अअपनी कबाएँ क़तर के देखते हैं ।" ~ सूरज उर्फ़ 'बाबा' (बनारस टॉकीज़) लेखक - सत्य व्यास मूल्य - रु. 152 (पेपरबैक) प्रकाशन - हिंद युग्म जिन्हे बनारस से प्रेम है उनके लिए तो कोहिनूर है 'बनारस टॉकीज़' और जिन्हे बनारस से प्रेम नहीं है, तो उन्हें पढ़कर अवश्य हो जाएगा। क्या ही कहना इस उपन्यास के बारे में…ये कहानी है बी• एच• यू• से एल• एल• बी• कर रहे है कुछ युवाओं की है। इसका मुख्य किरदार है ‘विशाल’ जो इस कहानी का वक्ता है और इस ...

सुकून और भाव का मिश्रण: मनाली

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  "सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ" - ख़्वाजा मीर दर्द मनाली, पहाड़ी ढलानों के बीच, मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्यों, आकर्षक जलधाराओं, छोटे छिपे हुए कॉटेज के आसपास परियों की कहानी जैसा कोहरा, और चीड़ और ताजगी की एक लंबी सुगंध के साथ पहाड़ प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। कुछ समय की तलाश में एक परिवार, कुछ शांति के लिए जोड़े, कुछ एकांत के लिए अकेले यात्री या रोमांच की तलाश में दोस्तों का समूह। मनाली हर तरह की यात्रा मानसिकता की जरूरतों को पूरा करता है। मेरी यात्रा दिल्ली के कश्मीरी गेट से वॉल्वो एसी स्लीपर से शुरू हुई। और मैं कुल्लू की लंबी यात्रा और संकरी सड़कों को तय करके सुबह 6 बजे मनाली पहुंच गयी लेकिन साथ ही हरे-भरे पहाड़ों और झरनों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी लिया। मेरा होटल वोल्वो बस स्टैंड के बहुत करीब था और चेक इन करने के बाद मैंने कुछ देर के लिए तरोताजा होकर आराम किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सुबह, मैंने सोलंग घाटी का दौरा किया, जो हरे-भरे पहाड़ों के अच्छे दृश्य प्रस्तुत करता है, और आप यहाँ सर्दियों में ग्लेशियर और ब...